Thursday, August 13, 2009

चरनदास चोर पर प्रतिबंध की भर्त्‍सना

छत्‍तीसगढ की भाजपा सरकार ने मशहूर रंगकर्मी हबीब तनवीर की नाट्रयरचना चरनदास चोर पर पिछले दिनों प्रतिबंध लगा दिया । जनवादी लेखक संघ ने इस फासीवादी कदम की निंदा की । यहां हम उस प्रेस विज्ञप्ति को दे रहे हैं -
प्रेस विज्ञप्ति
जनवादी लेखक संघ छत्‍तीसगढ की राज्‍य सरकार के द्वारा मशहूर रंगकर्मी मरहूम हबीब तनवीर के नाटक चरनदास चोर पर लगाये गये प्रतिबंध की कडे शब्‍दों में निंदा करता है । आर एस एस की फासीवादी विचारधारा से संचालित सरकार से और क्‍या उम्‍मीद की जा सकती है् ।
यह नाटक एक राजस्‍थानी लोककथा पर आधारित है जिसे पहले विजयदान देथा ने अपनी एक रचना में इस्‍तेमाल किया था । हबीब साहब ने उसे छत्तीसगढी भाषा, संस्कृति, लोक नाट्य और संगीत परंपरा के अनुकूल ढाल कर एक ऐसा नाटक रच दिया जिस आज एक समकालीन क्लासिक की संज्ञा दी जा सकती है। चरनदास का एक ही कसूर है कि वह अपने गुरु को दिये बचन का पालन करता है कि वह कभी झ्‍ूठ नहीं बोलेगा । आर एस एस की विचारधारा भला सत्‍य का पक्ष कैसे बरदाश्‍त कर सकती है। शायद इसीलिए प्रतिबंध लगाने की जरूरत आ गयी । सब जानते हैं कि यह नाटक एक लोककथा पर आधारित है जो 1974 में पहली बार खेला गया । तब से अब तक इस नाटक की न जाने कितनी भाषाओं में और, देश और विदेश में प्रस्‍तुतियां हुईं। 1975 में श्याम बेनेगल ने इस पर फिल्म भी बनायी। सभी जगह इस नाटक को सराहना मिली । लगता है कि आम जनता को धार्मिक और जातिगत आधार पर लडवाने के मकसद से ही संघ-भाजपा ने यह चाल चली है। वरना क्‍या वजह हो सकती है कि सतनामी संप्रदाय ने या खुद संघियों ने इस नाटक पर 2004 से पहले कोई आपत्ति क्‍यों नहीं उठायी थी, जबकि नाटक 1974 से खेला जा रहा था और बहुधा इसके अभिनेता भी सतनामी संप्रदाय से आते थे।
हबीब साहब के नाटकों पर संघ-भाजपा गिरोह समय समय पर हमले बोलते ही रहे है। अपने जीते जी उन्होंने इन हमलों का हर जगह बहादुरी से सामना किया था। यह किसी से छिपा नहीं है कि वे आर एस एस के संकीर्ण फासीवादी सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के खिलाफ रचनात्‍मक स्‍तर पर संघर्ष करते रहे थे। इसलिए चरनदास चोर पर प्रतिबंध भाजपा सरकारों की फासीवादी सांप्रदायिक मुहिम का ही एक हिस्सा है जिसके लिए सतनामी संप्रदाय की आड ली गयी है । जनवादी लेखक संघ किसी भी कलात्‍मक और रचनात्‍मक अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध के विरोध में अपनी आवाज बुलंद करता रहा है और इसीलिए तमाम लोकतांत्रिक और प्रगतिशील ताकतों के साथ एकजुटता बनाते हुए हबीब तनवीर के नाटक चरनदास चोर पर प्रतिबंध की भर्त्‍सना करता है ।

(मुरलीमनोहरप्रसाद सिंह) (चंचल चौहान)
महासचिव महासचिव
मोबाइल नं. 09212644978 मोबाइल नं. 09811119391

7 comments:

चंदन कुमार झा said...

चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है.......भविष्य के लिये ढेर सारी शुभकामनायें.

गुलमोहर का फूल

अशोक कुमार पाण्डेय said...

हम भी इस मुद्दे पर आपके साथ हैं

डा. मेराज अहमद said...

उपयोगी प्रस्तुति है। आशा है इस काम को आगे बढायेंगे।

हितेंद्र कुमार गुप्ता said...

Bahut Barhia... Aapka Swagat Hai... Isi tarah likhte rahiye

http://hellomithilaa.blogspot.com
Mithilak Gap...Maithili Me

http://mastgaane.blogspot.com
Manpasand Gaane

http://muskuraahat.blogspot.com
Aapke Bheje Photo

Amit K Sagar said...

प्रिय मित्र,
जश्ने-आजादी की बहुत-बहुत शुभकामनाएं. आज़ादी मुबारक हो.
----
उल्टा तीर पर पूरे अगस्त भर आज़ादी का जश्न "एक चिट्ठी देश के नाम लिखकर" मनाइए- बस इस अगस्त तक. आपकी चिट्ठी २९ अगस्त ०९ तक हमें आपकी तस्वीर व संक्षिप्त परिचय के साथ भेज दीजिये.
आभार.
विजिट करें;
उल्टा तीर
http://ultateer.blogspot.com
अमित के सागर

sandhyagupta said...

Abhivyakti ki swatantrata par koi bhi pratibandh anuchit hai.

Kishan Karighar "Naadan" said...

aapne ek sawaliya nishan lagya jo bilkul sahi hai..habib tanvir jaise mahan kalkar ki rachna par pratiband lagana sahitya aaour samaj ke liye theek nahi hai.